Santulit aahar kise kahate hain : संतुलित आहार किसे कहते हैं

Santulit aahar kise kahate hain

क्या आप जानते हैं कि “Santulit aahar kise kahate hain” संतुलित आहार किसे कहते हैं? भोजन जिसमें जीवधारी के लिए रोजाना आवश्यक ऊर्जा व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले, भोजन के सभी अवयवों की पर्याप्त मात्रा उपस्थित होती है santulit aahar या संतुलित भोजन कहलाता है.

Table of Contents

Santulit aahar (संतुलित आहार) में विभिन्न अवयवों की मात्रा, जीवधारी और उसके क्रियाकलाप के अनुसार बदलती रहती है जैसे एक व्यक्ति जो अधिक शारीरिक मेहनत करता है उसे अधिक कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है लेकिन अगर कोई व्यक्ति मानसिक कार्य करने वाला है तो उसे वसाओं की उचित मात्रा लेनी चाहिए.

भोजन के कार्य (Function of food)

Santulit aahar kise kahate hain इसमें बात करते हैं कि जीवित रहने के लिए भोजन बहुत जरूरी होता है जो शरीर में कुछ इस तरह से काम करता है-

  • विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक ऊर्जा की पूर्ति भोजन के द्वारा होती है.
  • विभिन्न उपापचय अभिक्रिया की निरंतरता के लिए आवश्यक पदार्थों की आपूर्ति भोजन से ही होती है जैसे- जल.
  • जब द्रव्यमान में वृद्धि के लिए आवश्यक अणुओं की आपूर्ति भोजन के अवयव से ही होती है.
  • शरीर का ताप स्तर रखने के लिए आवश्यक ऊर्जा भी भोजन से ही मिलती है.

 अब हम भोजन के मुख्य घटक के बारे में डिटेल में जानेंगे

 एक सामान्य रूप से कार्य करने वाले व्यक्ति को रोजाना औसतन 3 से 3.1 किलो कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसकी पूर्ति निम्नलिखित भोजन से की जा सकती है-

Santulit Aahar या संतुलित भोजन (सामान्य व्यक्ति के लिए)

Santulit aahar kise kahate hain इसमें एक सामान्य व्यक्ति के लिए निम्नलिखित अवयवों की मात्रा लगभग में दी गयी है-

क्र.स.अवयवों के नाममात्रा (ग्राम में)
1कार्बोहाइड्रेट400
2प्रोटीन100
3वसा75
4कैल्शियम02
5फास्फोरस05
6आयरन 03
संतुलित आहार में अवयवों की मात्रा

7. विटामिन—

विटामिन A- 700 IU

विटामिन B- 400 IU

विटामिन C- 40 mg

विटामिन D- 5 µg

santulit aahar में ऊपर लिखे हुए अवयवों के लिए हम निम्नलिखित भोज्य पदार्थ का इस्तेमाल कर सकते हैं-

क्र.स.भोज्य पदार्थवजन
1अनाज (Cereals)400-410 ग्राम
2दालें (Pulses)90-95 ग्राम
3हरी पत्तेदार सब्जियां (green leafy vegetables)400 ग्राम  
4घी तथा तेल (fat & oils)50 ग्राम
5फल (fruits)200 ग्राम
6शर्करा (sugar)50 ग्राम
7दूध (milk)½ लीटर
भोज्य पदार्थ

 इस खाने से लगभग 2800 कैलोरी प्राप्त होती है. कैलोरी बढ़ाने के लिए भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ाई जा सकती है.

भोजन के मुख्य घटक या तत्व (Food components)

1 कार्बोहाइड्रेट Carbohydrates

2 वसाएँ Lipids

3 प्रोटीन Proteins

4 विटामिन Vitamins

5 खनिज लवण Mineral

6 जल Water

1. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

कार्बोहाइड्रेट C, H और O से बने योगिक है यह पॉली हाइड्रोक्सी कार्बोनिल योगिक Poly Hydroxy carbonyl compounds होते हैं तथा जल अपघटन करने पर उपरोक्त योगिक देते हैं जल अपघटन के आधार पर यह निम्न वर्गों में विभाजित किए जा सकते हैं.

(A) मोनोसैकेराइड Monosaccharide- यह सरलतम कार्बोहाइड्रेट होते हैं और इनका जल अपघटन नहीं किया जा सकता है. यह जल में विनय तो होते हैं और स्वाद में मीठे क्रिस्टलीय ठोस भी होते हैं.

 जैसे- ग्लूकोस, फ्रुक्टोज.

(B) डाई सैटेलाइट- इनके एक अणु का अम्ल या एंजाइम उत्प्रेरक जल अपघटन करने पर दो अणु मोनोसैकेराइड प्राप्त होते हैं, यह भी जल में विलय होते हैं और स्वाद में मीठे होते हैं.

जैसे- माल्टोज, स्यूकोज, लेक्टोज आदि.

(C) पॉलिसैकेराइड- इनके अनु का जल अपघटन करने पर बहुत सी मोनोसैकेराइट इकाई प्राप्त होती है. एक पॉलिसैकेराइड अणु में 10 से लेकर सैकड़ों तक मोनोसैकेराइड इकाइयां उपस्थित हो सकती हैं. यह जल में अविलय होते हैं तथा स्वाद रहित होते हैं. 

जैसे-सैलूलोज, स्टार्ट आदि.

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत

मुख्य कार्बोहाइड्रेट के कुछ सामान्य स्रोत निम्नलिखित है.

1. ग्लूकोस- मुक्त अवस्था में ग्लूकोस मीठे फलों में पाया जाता है. इसके साथ शहद भी इसका महत्वपूर्ण स्रोत है. यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण कार्बोहाइड्रेट है क्योंकि भोजन के लिए संपूर्ण कार्बोहाइड्रेट पाचन के बाद ग्लूकोस में ही बदल जाते हैं अतः विभिन्न पॉलिसैचेराइड स्टार्ट आदि भी ग्लूकोज के महत्वपूर्ण स्रोत हैं शर्करा में यह फ्रक्टोज के साथ संयुक्त अवस्था में पाया जाता है. 

2. फ्रक्टोज- यह भी एक महत्वपूर्ण मनुष्य के राइट है और यह गन्ने के रस व मीठे फलों में पाया जाता है.

3. स्यूक्रोज य शर्करा– यह एक डाइसेकेराइट है और इसका मुख्य स्रोत गन्ने की मिठास है.

4. लेक्टोज- इसका मुख्य स्रोत दूध है.

भोजन में कार्बोहाइड्रेट का महत्व
  • कार्बोहाइड्रेट भोजन के ऊर्जा स्रोत है और शरीर द्वारा आवश्यक ऊर्जा का ज्यादातर भाग इन्हीं के ऑक्सीकरण से प्राप्त होता है.
  • यह वसा तथा प्रोटीन के संश्लेषण में प्रयोग होते हैं.
  •  न्यूक्लिक अम्ल डीएनए और आरएनए के संश्लेषण में भाग लेते हैं. 

2. तेल तथा वसा (Oil and Fat)

यह लिपिड श्रेणी के योगिक है. ग्लसरॉल “ट्राईहाइड्रिक एल्कोहोल” पर कुछ वसा अम्ल की क्रिया से प्राप्त ट्राई एस्टर लिपिड कहलाते हैं वसा अम्ल की प्रकृति के आधार पर लिपिड दो प्रकार के होते हैं.

1. वसा- यह लिपिड जिन में उपस्थित वसा अम्ल संतृप्त होता है वसा कहलाते हैं और कमरे के ताप पर यह ठोस होते हैं. इनका संश्लेषण समानता जंतुओं में होता है, जैसे मक्खन आदि.

2. तेल- इन में उपस्थित वसा अम्ल संतृप्त होता है तथा कमरे के ताप पर यह द्रव होते हैं.

तेल तथा वसा के स्रोत
  • वसाओं में मुख्य स्रोत घी, मक्खन, मछली, मांस आदि है. 
  • तेलों में मुख्य स्रोत वनस्पतियां जैसे सरसों, तेल, सूरजमुखी इत्यादि है.
भोजन में वसाओं का महत्व
  • कार्बोहाइड्रेट की तरह वसाओं के ऑक्सीकरण से भी ऊर्जा प्राप्त होती है. एक अणु ग्लूकोस की तुलना में एक वसा अणु से अधिक ऊर्जा लगभग दो से ढाई गुना प्राप्त होती है अतः वसाएँ उच्च ऊर्जा उत्पादन के स्रोत हैं.
  • कोशा झिल्ली में फास्फोलिपिड महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
  • वसा ऊतकों के निर्माण में सहायता करते हैं जो शरीर के ताप नियंत्रक की तरह कार्य करते हैं. वसा ऊतक चोट रोधक की तरह भी कार्य करते हैं.
  • विटामिन A, D, E,तथा K, के लिए यह विलायक की तरह कार्य करते हैं और उनके अवशोषण में सहायता करते हैं.   संचित भोजन के रूप में भी वसाओं का योगदान होता है.
  • भोजन में वसा की मात्रा अधिक होने पर शरीर में वसा ऊतकों मैं वृद्धि होती है जिससे मोटापा बढ़ जाता है जिसके कारण अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं. दूसरी ओर शरीर में वसा की कमी होने पर त्वचा संबंधी रोग भी हो जाते हैं. इसीलिए शरीर के अंदर वसा की मात्रा उतनी ही होना चाहिए जितनी कि शरीर को इसकी आवश्यकता हो.

3. प्रोटीन (Proteins)

प्रोटीन protein शब्द ग्रीक शब्द से लिया गया है यह C, H, O व N युक्त कार्बनिक योगिक है जिसमें कुछ मात्रा में S, P इत्यादि तत्व भी होते हैं. प्रोटीन शब्द का प्रयोग सबसे पहले मुलर ने 1839 मैं किया था.

 यह उच्च अणुभार के जटिल प्राकृतिक बहुलक हैं जिनमें एक लाख इकाई अल्फा अमीनो अम्ल होते हैं. विविन प्रोटीन ओं का जल अपघटन करने पर अल्फा अमीनो अम्ल का मिश्रण प्राप्त होता है. प्रोटीन ओं में यह एमिनो अम्ल पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े होते हैं अतः ने खोली मिरिक एमिनेम भी कह सकते हैं.

प्रोटीन के स्रोत

 1 जंतु प्रोटीन- दूध, अंडा, पनीर, मांस, मछली इत्यादि प्रोटींस हमें जंतुओं से मिलते हैं.

2. वनस्पति प्रोटीन- कई तरह की दलहनों जैसे- दाल, राजमा, सोयाबीन आदि. इसके अलावा प्रोटीन हमें फलों तथा सब्जियों में भी मिलता है.

 भोजन में प्रोटीन का महत्व
  • प्रोटीन जैब द्रव्यमान संश्लेषण में प्रयोग होती है.
  • प्रोटीन क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत में आवश्यक कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होती है.
  • शरीर के विभिन्न जैविक द्रव्यों की pH भी प्रोटीन द्वारा नियंत्रित होती है.
  • प्रोटीन शरीर में उपस्थित विभिन्न जंतुओं को दृढ़ता प्रदान करती है.
  • शरीर में होने वाली सभी क्रियाएं एंजाइम उत्प्रेरित होती हैं तथा सभी एंजाइम प्रोटीन होते हैं.
  • प्रोटीन शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने में सहायक एंटीबॉडी के निर्माण में सहायक होती हैं.
  • विभिन्न प्रोटीन जैसे न्यूक्लियोप्रोटीन इत्यादि कोशिकाओं के आवश्यक अवयव है.
  • आवश्यकता पड़ने पर प्रोटीन ऊर्जा स्रोत की तरह भी काम करती है. 

4. खनिज लवण (Mineral)

Santulit aahar में खनिज लवण का बहुत ही महत्त्पूर्ण गोगदान है . शरीर में होने वाली अभिक्रिया में खनिज लवणों का भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है. क्योंकि यह लवण अम्लीय क्षारीय माध्यम आदि उत्पन्न करने में सहायता करते हैं. और इसके अलावा चेतना संवेदन ( impulse conduction), हृदय स्पंदन (Heart beating), आदि में भी यह महत्वपूर्ण योगदान देते हैं भोजन में खनिज लवण के कुछ मुख्य तत्वों के स्रोत व उनके कार्य निम्नलिखित हैं.

1. कैल्शियम (Ca) 1.5%

 यह दूध, अंडा, पनीर, हरी सब्जियां आदि में पाया जाता है.

इसकी कमी से शरीर में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और यह हड्डियों और दातों के निर्माण में, मांसपेशियों की क्रिया में, स्नायु तंत्र की क्रिया में, हृदय गति के नियंत्रण में इसका महत्वपूर्ण योगदान है. 

2. सोडियम (Na) 0.15%

 इसका मुख्य स्रोत नमक है.

सोडियम का महत्व का स्रोत शरीर में सक्रिय संवहन मतलब एक्टिव ट्रांसपोर्ट में, शरीर में परासरण दाब के नियंत्रण में, जल संतुलन में होता है. 

3. पोटेशियम (K) 0.35%

पोटेशियम का मुख्य स्रोत अनाजों का छिलका, फली वाली सब्जियां, पनीर आदि है.

पोटेशियम का हमारे शरीर में महत्व पेशी तंत्र की क्रिया विधि में, हृदय गति के नियंत्रण आदि में होता हैं.

4. मैग्नीशियम (Mg)

मैग्नीशियम का स्रोत अनाजों का छिलका, फली, मटर आदि है.

मैग्नीशियम का कार्य हमारे शरीर में पेशी तंत्र की क्रिया विधि में, हड्डियों व स्नायु तंत्र के विकास में होता है.

5. जिंक (Zn)

जिंक का स्रोत मटर, फलियाँ आदि है तथा इसका महत्व सामान्य वृद्धि है.

6. कोबाल्ट (Co)

इसका का स्रोत समुंद्री भोज्य पदार्थों होता है और इसका महत्व भी सामान्य वृद्धि है.

7. कॉपर (Cu)

कॉपर का स्रोत अनाजों का छिलका, मशरूम, मटर आदि है और यह शरीर में हीमोग्लोबिन के संश्लेषण में काम आता है.

8. आयरन (Fe)

आयरन का स्रोत अंडा, मांस, पालक, सेव, अमरुद आदि हैं. आयरन हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन, मायोग्लोबिन आदि के संश्लेषण के काम आता है और इसकी कमी से एनिमिया हो जाता है.

9. फॉस्फोरस (P)

इसका स्रोत दूध, हरी सब्जियां, गाजर, मूली आदि हैं, इसका महत्व हड्डियों व कोशाओं के निर्माण में होता है.

10. फ्लुओरीन (F)

फ्लुओरीन हमें चाय, कॉफ़ी, समुंद्री भोज्य पदार्थ आदि से प्राप्त होती है और यह दाँतों को मजबूती प्रदान करता है और हड्डियों में भी इसका महत्व है.

11. क्लोरिन (Cl)

इसका मुख्य स्रोत नमक है, क्लोरिन का महत्व आमाशय में HCL के निर्माण में है.

12 सल्फर (S)

सल्फर का स्रोत्र अनाजों के छिलके, पनीर, प्याज, माँस, मछली आदि है. सल्फर का महत्व प्रोटीन संश्लेषण में होता है.

13. आयोडीन (I)

यह आयोडीन युक्त नमक, गोभी तथा समुंद्री भोज्य पदार्थो में होता है. इसका महत्व ग्रन्थि से उत्पन्न हार्मोनो के निर्माण में होता है. और आयोडीन की कमी से शरीर में घेघा (goitere) नामक रोग हो जाता है.

5. विटामिन (Vitamins)

Santulit aahar, vitamins के बिना बिल्कुल अधूरी है तो अब हम vitamins के बारे में जानेंगे, विटामिन शब्द का प्रयोग सबसे पहले फंक ने सन् 1912 में किआ था. शरीर की सामान्य क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए बिटामिन जरूरी होते है. विलेयता के आधार पर विटामिन को दो समूहों में बाँटा गया है.

(1) वसा में विलेय विटामिन (Fat soluble vitamins) विटामिन A, D, E व K वसा में विलय हैं.

(2) जल में विलय विटामिन (Water soluble vitamins) अन्य विटामिन जैसे B complex, विटामिन C आदि जल में विलेय हैं.

अब हम कुछ मुख्य विटामिन्स के बारे में जानेंगे कि इनका स्रोत्र क्या है और इनकी कमी से हमारे शरीर में कौन कौन से बीमारियाँ हो जाती हैं.

1. विटामिन ए (Vitamin A)

यह दो भागों में बांटा गया है विटामिन A1 और विटामिन A2. विटामिन A1 को रेटिनॉल और विटामिन A2 को डिहाइड्रोरेटिनॉलकहते हैं.

विटामिन A1 का स्रोत्र दूध, मक्खन, हरी सब्जियां, गाजर, पालक, कद्दू आदि है और विटामिन A2 का स्रोत्र यह स्वच्छ जलीय मछलियों के यकृत के निष्कर्ष में होता है.

इन दोनों विटामिन्स की कमी से होने वाले रोग निम्नलिखित हैं.

  • रतौंधी night blindness
  • प्रतिरोधी क्षमता घट जाती है.
  • आँख व त्वचा से रिलेटिव भी कुछ विमारियां हो जाती हैं.

2. विटामिन बी कॉम्प्लेक्स (Vitamin B Complex)

यह लगभग 15 विटामिनों का जटिल मिश्रण है; जिनमे यहाँ हम आपको कुछ विटामिन्स के बारे में बताएँगे.

विटामिन B1 (थायमीन या ऐन्यूरिन)

इसके मुख्य स्रोत्र दूध, डाल, हरी सब्जियां, मांस, मछली, यीस्ट आदि हैं.

इसकी कमी से बेरी-बेरी, आमाशयी रोग, शारीरिक विकास में कमी आदि रोग हो जाते हैं.

विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन)

इसके मुख्य स्रोत्र चावल की भूसी, दूध, पनीर, अंडा, माँस, मछली आदि हैं.

इसकी कमी से शरीर वृद्धि में कमी हो जाती है, होंट काटने फटने लगते हैं और त्वचा रोग भी हो जाते हैं.

विटामिन B3 (पेंटोथीनिक)

यह लगभग सभी सामान्य खाद्ध पदार्थों में पाया जाता है लेकिन इसका मुख्य स्रोत्र यकृत, यीस्ट आदि होते हैं.

विटामिन B5 (नियासिन)

ताजा माँस, यकृत दालें, दूध, अनाज आदि इसके मुख्य स्रोत्र हैं.

इसकी कमी से मानसिक असंतुलन, पाचन सम्बन्धी आदि बीमारियाँ हो जाती हैं.

विटामिन B6 (पाइरीडॉक्सिन)

इसका मुख्य स्रोत्र खमीर, मक्का, गेहूँ, माँस, मछली आदि हैं.

इसकी कमी से एनीमिया रोग होता है.

विटामिन B12 (साइनोकोबालामीन)

इसका मुख्य स्रोत्र मछली, दूध, अंडा, यकृत, माँस आदि हैं.

इसकी कमी से भी एनीमिया रोग हो जाता है.

तो विटामिन B काम्प्लेक्स के और भी कुछ भाग हैं जो लगभग एक दुसरे के सामान हैं तो अब हम इसको यही छोड़ कर आगे बड़ते हैं.

3. विटामिन सी (Vitamin C)

 विटामिन सी को एस्कॉर्बिक अम्लभी कहते हैं तथा इसका मुख्य स्रोत खट्टे फल जैसे- नींबू, संतरा, आंवला आदि और इसके अलावा यह हरी सब्जियां, आलू, टमाटर आदि में पाया जाता है.

 इसकी कमी से स्कर्वी रोग तथा हड्डियां भंगुर हो जाती है.

4. विटामिन डी (Vitamin D)

विटामिन डी सात विटामिनों का मिश्रण है जैसे- D1, D2, D3, D4, D5, D6, D7.

इनमें विटामिन D2 मुख्य है जिसको कैल्सिफेरोल कहते हैं. 

विटामिन डी का स्रोत दूध, मक्खन, घी, अंडा आदि है और विटामिन डी को त्वचा भी धूप में अवशोषित करती है तो इसका धूप भी स्रोत है.

 इसकी कमी से रिकेट्स रोग होता है तथा हड्डियां व दांत कमजोर भी हो जाते हैं.

5. विटामिन ई (Vitamin E)

यह आठ यौगिकों का मिश्रण होता है जिसमें टोकॉफरोल मुख्य है जिसका स्रोत अंकुरित गेहूं का तेल, सूर्यमुखी का तेल, अंडा, मांस है.

इसकी कमी से होने वाला रोग बंधयता Sterility है.

6. विटामिन के (Vitamin K)

 विटामिन के पालक गाजर गोभी आदि में पाया जाता है तथा विटामिन k की कमी से रक्त स्कंदन देर से होता है.

6. जल (Water)

Santulit aahar में स्वच्छ पानी पीना बहुत ही जरूरी होता है तो जल भी भोजन का महत्वपूर्ण घटक है, क्योंकि क्यह भोजन के विभिन्न अवयवों के विलायक की तरह काम करता है.

इसके मुख्य कार्य- भोजन के पाचन व अवशोषण में सहायक, ताप नियंत्रण के लिए आवश्यक, विभिन्न क्रियाओं में विलायक की तरह कार्य करना आदि. आशा करते हैं कि अब तक आप Santulit aahar kise kahate hain यह समझ गए होगे.

दोस्तों के साथ शेयर करें
Shanu khan
Shanu khan

Hi dear Reader !
I’m Shanu Ali Khan from Uttar Pradesh; my qualification is postgraduate. I am founder of hindieducation[dot]in site. I’m freelancer as well as Hindi writer.

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *