अगर आप कॉमर्स में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके मन में सबसे पहले यही सवाल आएगा कि अकाउंटेंट बनने के लिए क्या करें (Accountant Banne Ke Liye Kya Kare)। अकाउंटेंट की जरूरत छोटी दुकान से लेकर बड़ी कंपनी, बैंक और सरकारी विभाग तक हर जगह होती है, इसलिए यह करियर काफी स्थिर माना जाता है। इस लेख में हम सरल भाषा में बताएंगे कि अकाउंटेंट कैसे बनें, 12वीं के बाद कौन-सा कोर्स करें, कितनी फीस लगती है, सरकारी नौकरी कैसे मिलती है और सैलरी कितनी हो सकती है।
विषय सूची
अकाउंटेंट करियर (Overview Table)
| बिंदु | जानकारी |
| न्यूनतम योग्यता | आमतौर पर 12वीं; कई प्राइवेट नौकरियों में B.Com या डिग्री पसंद की जाती है |
| पसंदीदा स्ट्रीम | कॉमर्स (अन्य स्ट्रीम वाले भी कोर्स करके आ सकते हैं) |
| जरूरी कोर्स | B.Com, Tally Prime, Diploma in Accounting, GST कोर्स |
| जरूरी स्किल | Excel, Tally, GST, Bookkeeping, Accuracy |
| शुरुआती सैलरी (अनुमानित) | लगभग ₹10,000–₹25,000 प्रति माह |
| सरकारी विकल्प | SSC, राज्य स्तरीय भर्तियाँ, बैंक और अन्य विभाग |
अकाउंटेंट कौन होता है और क्या काम करता है?
अकाउंटेंट वह व्यक्ति होता है जो किसी दुकान, कंपनी या संस्था के पैसों के लेन-देन का सही और व्यवस्थित हिसाब रखता है। आसान शब्दों में, कमाई कहाँ से आई, खर्च कहाँ हुआ और कितना पैसा बचा, यह सब रिकॉर्ड में रखना उसकी जिम्मेदारी है।
अकाउंटेंट के सामान्य कामों में ये शामिल हैं:
- रोजाना की खरीद-बिक्री और अन्य लेन-देन की एंट्री करना
- इनवॉइस और बिल तैयार करना
- बैंक स्टेटमेंट का मिलान (Bank Reconciliation) करना
- GST रिटर्न के लिए डेटा तैयार करना
- Tally जैसे सॉफ्टवेयर में खाते मेंटेन करना
- सैलरी, TDS और अन्य भुगतानों का रिकॉर्ड रखना
- महीने या साल के अंत में लाभ-हानि (Profit & Loss) और बैलेंस शीट की रिपोर्ट बनाना
कंपनी के आकार के अनुसार काम बदल सकता है। छोटी फर्म में एक अकाउंटेंट लगभग सब कुछ संभालता है, जबकि बड़ी कंपनी में अलग-अलग काम के लिए अलग टीमें होती हैं।
अकाउंटेंट बनने के लिए क्या करें?
1. 12वीं कक्षा पास करें: इसमें कॉमर्स स्ट्रीम सबसे सुविधाजनक है, क्योंकि इसमें अकाउंटेंसी और बिजनेस स्टडीज़ की नींव बन जाती है।
2. अकाउंटिंग से जुड़ा कोर्स चुनें: अपने लक्ष्य के अनुसार B.Com की डिग्री या Tally और डिप्लोमा जैसे जॉब-ओरिएंटेड कोर्स कर सकते हो जो आपको Accountant बनने में मदद करते हैं।
3. कंप्यूटर, Excel और Tally सीखें: आज ज्यादातर अकाउंटिंग कंप्यूटर पर होती है, इसलिए Excel के बेसिक फॉर्मूले और Tally Prime पर पकड़ जरूरी है।
4. GST और बेसिक टैक्सेशन समझें। GST इनवॉइस, रिटर्न और TDS की बुनियादी समझ आपको Accountant के करियर को और आसान बनाती है।
5. इंटर्नशिप या प्रैक्टिकल अनुभव लें: किसी स्थानीय अकाउंटेंट, टैक्स कंसल्टेंट या छोटी फर्म के साथ काम करने से असली काम सीखने को मिलता है, जब एक बार अनुभव हो जाता है फिर आप इस फ़ील्ड में आसानी से कदम रख सकते हैं।
6. नौकरी के लिए आवेदन करें: रिज्यूमे में अपने कोर्स, सॉफ्टवेयर स्किल और इंटर्नशिप का अनुभव साफ लिखें और फिर आवेदन करें।
अकाउंटेंट बनने के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए?
शैक्षणिक योग्यता: आमतौर पर 12वीं पास होना न्यूनतम आधार माना जाता है। कई कंपनियाँ B.Com या किसी भी विषय में स्नातक वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं। ध्यान रखें कि अकाउंटेंट के लिए कोई एक तय कानूनी योग्यता नहीं है। निजी क्षेत्र में योग्यता नियोक्ता तय करता है, जबकि सरकारी पदों के लिए भर्ती विज्ञापन में अलग योग्यता दी जाती है।
जरूरी स्किल: अंकों और गणना में सहजता, बारीकी से काम करने की आदत, ईमानदारी और समय पर काम पूरा करने की क्षमता।
कंप्यूटर ज्ञान: MS Excel, Tally Prime और टाइपिंग की बुनियादी जानकारी। कई जगह GST पोर्टल पर काम की समझ भी मांगी जाती है।
अलग-अलग नौकरियों में अंतर:
- छोटी दुकान या फर्म में 12वीं के साथ Tally और अनुभव काफी हो सकता है।
- मध्यम और बड़ी कंपनियों में आमतौर पर B.Com या समकक्ष डिग्री मांगी जाती है।
- सरकारी पदों में विज्ञापन के अनुसार ग्रेजुएशन, कॉमर्स की डिग्री या विशेष योग्यता की शर्त हो सकती है।
10वीं और 12वीं के बाद अकाउंटेंट कैसे बनें?
10वीं के बाद अकाउंटेंट कैसे बनें?
10वीं के बाद सीधे अकाउंटेंट की नौकरी मिलना मुश्किल होता है, लेकिन नींव यहीं से बनाई जा सकती है:
- 11वीं में कॉमर्स स्ट्रीम चुनें (अकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज़, इकोनॉमिक्स)।
- साथ में कंप्यूटर की बेसिक जानकारी और टाइपिंग सीखें।
- खाली समय में Bookkeeping की मूल बातें सीखें। कुछ संस्थान 10वीं पास को भी बेसिक कंप्यूटर या अकाउंटिंग कोर्स में प्रवेश देते हैं, पर इसकी पात्रता संस्थान से पूछ लें।
12वीं के बाद अकाउंटेंट कैसे बनें?
कॉमर्स स्ट्रीम वाले विद्यार्थी इनमें से चुन सकते हैं:
- B.Com: लंबे समय के लिए मजबूत आधार, खासकर सरकारी और बैंकिंग परीक्षाओं के लिए उपयोगी।
- जॉब-ओरिएंटेड कोर्स: Tally Prime, कंप्यूटराइज्ड अकाउंटिंग या GST कोर्स करके जल्दी काम शुरू किया जा सकता है।
- दोनों साथ में: कई विद्यार्थी B.Com के दौरान ही Tally और GST सीख लेते हैं, जो सबसे व्यावहारिक तरीका है।
आर्ट्स या साइंस के विद्यार्थी भी अकाउंटिंग में आ सकते हैं:
- कई विश्वविद्यालयों में किसी भी स्ट्रीम के विद्यार्थी B.Com में प्रवेश ले सकते हैं, पर कुछ में विषय की शर्त होती है, इसलिए प्रवेश नियम जरूर जांचें।
- सीधे Tally, GST और Excel जैसे शॉर्ट-टर्म कोर्स करके भी शुरुआत की जा सकती है।
- अपनी स्ट्रीम की डिग्री के साथ अकाउंटिंग का कोर्स जोड़कर प्रोफाइल मजबूत बनाई जा सकती है।
अकाउंटेंट बनने के लिए कौन-सा कोर्स करें?
अपने बजट, समय और लक्ष्य के अनुसार कोर्स चुनें। नीचे लोकप्रिय विकल्प दिए गए हैं।
| कोर्स का नाम | अवधि |
| B.Com | सामान्यतः 3–4 वर्ष |
| Tally Prime Course | लगभग 2–6 महीने |
| Diploma in Accounting | लगभग 6–12 महीने |
| Computerized Accounting Course | लगभग 3–12 महीने |
| GST and Taxation Course | लगभग 3–6 महीने |
कौन-सा रास्ता किसके लिए ठीक है? जिन्हें जल्दी नौकरी चाहिए, वे Tally और GST से शुरुआत कर सकते हैं। जो लंबे करियर, सरकारी परीक्षा या आगे की पढ़ाई सोच रहे हैं, उनके लिए B.Com बेहतर आधार है।
अकाउंटेंट कोर्स की फीस कितनी होती है?
फीस शहर, संस्थान और सुविधाओं पर निर्भर करती है। नीचे सिर्फ मोटा अनुमान है, तय फीस नहीं।
- सरकारी कॉलेज (B.Com): आमतौर पर काफी कम, लगभग कुछ हजार रुपये से लेकर कुछ दसियों हजार रुपये प्रति वर्ष तक। राज्य और विश्वविद्यालय के अनुसार अंतर रहता है।
- प्राइवेट कॉलेज (B.Com): लगभग ₹20,000 से ₹1,00,000 या उससे अधिक प्रति वर्ष, कॉलेज की श्रेणी के अनुसार।
- कंप्यूटर अकाउंटिंग कोर्स (Tally, GST, डिप्लोमा): लगभग ₹5,000 से ₹30,000 के बीच, कोर्स की अवधि और संस्थान पर निर्भर।
फीस जांचने के सुझाव: हमेशा लिखित फीस स्ट्रक्चर मांगें, छिपे शुल्क पूछें और प्लेसमेंट के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों पर आँख बंद करके भरोसा न करें। सरकारी कॉलेज की फीस उनकी आधिकारिक वेबसाइट या प्रवेश पोर्टल पर देखें।
अकाउंटेंट बनने के लिए कौन-सी स्किल जरूरी हैं?
- MS Excel: डेटा सॉर्टिंग, VLOOKUP/XLOOKUP, पिवट टेबल और बेसिक फॉर्मूले लगभग हर अकाउंटिंग जॉब में काम आते हैं।
- Tally Prime: भारत में छोटे और मध्यम व्यवसायों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर में से एक है।
- GST की समझ: इनवॉइस, इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिटर्न फाइलिंग की जानकारी आपकी वैल्यू बढ़ाती है।
- Bookkeeping: डेबिट-क्रेडिट के नियम, जर्नल एंट्री, लेजर और ट्रायल बैलेंस की मजबूत समझ।
- Communication: मैनेजर, ग्राहकों और टैक्स ऑफिसर के साथ साफ बातचीत और रिपोर्टिंग।
- Accuracy और ईमानदारी: एक छोटी गलती भी पूरे हिसाब को बिगाड़ सकती है, इसलिए सटीकता सबसे बड़ी खूबी है।
अकाउंटेंट की नौकरी कैसे मिलेगी?
शुरुआती पद जिन पर फ्रेशर आवेदन कर सकते हैं:
- फ्रेशर अकाउंटेंट
- जूनियर अकाउंटेंट
- अकाउंट्स असिस्टेंट / अकाउंट्स एग्जीक्यूटिव
- डेटा एंट्री ऑपरेटर (अकाउंट्स सेक्शन)
नौकरी पाने के तरीके:
- रिज्यूमे बनाएं: कोर्स, Tally/Excel स्किल और इंटर्नशिप साफ लिखें।
- जॉब पोर्टल का उपयोग करें: Naukri, Indeed, LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर “Accountant Fresher” जैसे शब्दों से खोजें।
- स्थानीय नेटवर्क बनाएं: CA फर्म, टैक्स कंसल्टेंट, व्यापारी और ट्रेडर्स के पास सीधे संपर्क करें। छोटे शहरों में यह काफी कारगर रहता है।
- इंटरव्यू की तैयारी करें: बेसिक अकाउंटिंग, GST और Tally के प्रैक्टिकल सवालों का अभ्यास करें।
- पहले अनुभव को महत्व दें: शुरू में सैलरी से ज्यादा सीखने पर ध्यान दें, क्योंकि 1–2 साल के अनुभव के बाद बेहतर मौके मिलते हैं।
सरकारी अकाउंटेंट कैसे बनें?
सरकारी क्षेत्र में अकाउंटिंग से जुड़े पद अलग-अलग विभागों में होते हैं, और हर पद की भर्ती प्रक्रिया अलग होती है। कोई एक परीक्षा सभी सरकारी अकाउंटेंट नौकरियों के लिए अनिवार्य नहीं है। आमतौर पर ये रास्ते देखे जाते हैं:
- SSC की परीक्षाएं: SSC CGL जैसी परीक्षाओं के जरिए कुछ विभागों में Junior Accountant, Auditor या Accountant जैसे पदों की भर्ती होती है। हर साल के नोटिफिकेशन में पदों और योग्यता की जानकारी बदल सकती है।
- राज्य स्तरीय भर्तियाँ: राज्य सरकारों के कोषागार, पंचायत, शिक्षा और अन्य विभाग अपने स्तर पर अकाउंट्स क्लर्क या अकाउंटेंट पद निकालते हैं। इसके लिए राज्य के लोक सेवा आयोग या अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की वेबसाइट देखें।
- बैंक और सहकारी संस्थाएं: बैंकों और कुछ सहकारी संस्थाओं में अकाउंट्स से जुड़ी भूमिकाएं होती हैं, जिनकी भर्ती अलग से होती है।
- रेलवे और अन्य केंद्रीय विभाग: यहाँ भी समय-समय पर अकाउंट्स से संबंधित पदों के लिए भर्ती निकलती है।
अकाउंटेंट की सैलरी कितनी होती है?
सैलरी एक निश्चित संख्या नहीं होती। यह आपके अनुभव, शहर, कंपनी के आकार, स्किल और पद पर निर्भर करती है। नीचे प्रचलित स्थिति के आधार पर अनुमानित रेंज है:
| पद / स्तर | अनुमानित मासिक सैलरी |
| फ्रेशर अकाउंटेंट (प्राइवेट) | लगभग ₹10,000 – ₹25,000 |
| अनुभवी अकाउंटेंट (3–5 वर्ष) | लगभग ₹25,000 – ₹50,000 |
| सीनियर अकाउंटेंट / अकाउंट्स मैनेजर | लगभग ₹40,000 – ₹80,000 या अधिक |
| सरकारी अकाउंटिंग पद | पद और पे लेवल के अनुसार, भत्तों सहित कई पदों पर लगभग ₹30,000 – ₹60,000 के आसपास |
अकाउंटेंट और CA में क्या अंतर है?
कई विद्यार्थी अकाउंटेंट और CA को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ये दो अलग पेशे हैं। CA का फुल फॉर्म Chartered Accountant है। यह ICAI द्वारा दी जाने वाली एक प्रोफेशनल योग्यता है, जबकि अकाउंटेंट एक व्यापक शब्द है जिसमें कई स्तर के अकाउंटिंग कर्मचारी आते हैं।
| आधार | अकाउंटेंट | CA (Chartered Accountant) |
| प्रकृति | रोजमर्रा का हिसाब-किताब संभालने वाला पेशेवर | ऑडिट, टैक्स और फाइनेंस सलाह देने वाला प्रोफेशनल |
| योग्यता | 12वीं, B.Com, Tally या डिप्लोमा जैसी योग्यताएं | ICAI की तय परीक्षाएं और प्रशिक्षण पास करना जरूरी |
| काम | एंट्री, बिलिंग, GST डेटा, बैंक मिलान | ऑडिट, टैक्स प्लानिंग, कंपनी लॉ और वित्तीय सलाह |
| तैयारी का समय | अपेक्षाकृत कम (कुछ महीने से कुछ साल) | लंबी और कठिन प्रक्रिया |
| प्रवेश बाधा | कम | उच्च |
निष्कर्ष
अकाउंटेंट बनने का रास्ता कठिन नहीं है, बस सही योजना चाहिए। 12वीं के बाद अपने लक्ष्य के अनुसार B.Com या Tally, GST और अकाउंटिंग डिप्लोमा जैसे कोर्स चुनें। साथ में Excel और Tally पर पक्की पकड़ बनाएं और इंटर्नशिप से व्यावहारिक अनुभव लें। जल्दी नौकरी चाहिए तो शॉर्ट-टर्म कोर्स उपयोगी हैं, और सरकारी नौकरी या लंबे करियर के लिए डिग्री अधिक मजबूत विकल्प है। नियमित अभ्यास और सीखने की आदत से आप इस क्षेत्र में अच्छी जगह बना सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. अकाउंटेंट बनने के लिए कौन-सी पढ़ाई करनी पड़ती है?
अकाउंटेंट बनने के लिए आमतौर पर 12वीं के बाद B.Com करना अच्छा माना जाता है। इसके साथ Tally Prime, Excel और GST जैसे कोर्स सीखना जरूरी है। छोटी नौकरियों में सिर्फ 12वीं और Tally से भी शुरुआत संभव है।
2. क्या 12वीं आर्ट्स के बाद अकाउंटेंट बन सकते हैं?
हाँ, बन सकते हैं। आर्ट्स के विद्यार्थी Tally, GST और कंप्यूटराइज्ड अकाउंटिंग जैसे कोर्स करके शुरुआत कर सकते हैं। कई विश्वविद्यालयों में B.Com में भी प्रवेश मिल जाता है, पर विषय संबंधी शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए प्रवेश नियम पहले जांचें।
3. क्या बिना B.Com के अकाउंटेंट बन सकते हैं?
हाँ, निजी क्षेत्र में कई जगह बिना B.Com के भी काम मिल जाता है, बशर्ते आपके पास Tally, Excel और GST की मजबूत स्किल हो। हालांकि बड़ी कंपनियों और सरकारी पदों में डिग्री अक्सर मांगी जाती है, इसलिए भविष्य के लिए डिग्री फायदेमंद रहती है।
4. अकाउंटेंट बनने में कितने साल लगते हैं?
यह आपके चुने रास्ते पर निर्भर करता है। Tally या डिप्लोमा कोर्स से कुछ महीनों में काम शुरू किया जा सकता है, जबकि B.Com में सामान्यतः 3–4 वर्ष लगते हैं। अनुभव और स्किल के साथ आपकी प्रोफाइल धीरे-धीरे मजबूत होती जाती है।
5. क्या Tally सीखकर अकाउंटेंट बन सकते हैं?
Tally सीखकर आप छोटी फर्मों, दुकानों और कई प्राइवेट कंपनियों में अकाउंट्स असिस्टेंट या जूनियर अकाउंटेंट की नौकरी पा सकते हैं। लेकिन अकेला Tally काफी नहीं होता। बेहतर मौकों के लिए Excel, GST और बेसिक अकाउंटिंग की समझ भी साथ में जरूरी है।

Shanu Ali Khan is a Hindi education writer with a postgraduate qualification. He writes career guidance articles and study materials for students in simple Hindi. He has over five years of experience in educational content writing.




